नवरात्रि में संसद का विशेष सत्र! महिला आरक्षण और परिसीमन पर सरकार की नजर
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| नई दिल्ली स्थित नया संसद भवन। फोटो: PIB |
नई दिल्ली | 12 सितंबर 2026
संसद के विशेष सत्र को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार नवरात्रि के दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाने पर फैसला कर सकती है। इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, अभी तक सरकार की तरफ से विशेष सत्र बुलाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल यह मामला सरकार के संभावित फैसले से जुड़ा हुआ है।
दरअसल, संसद का मानसून सत्र खत्म होने के बाद भी उसका औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है। इसी वजह से यह चर्चा शुरू हुई कि सरकार जरूरत पड़ने पर संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।
बताया जा रहा है कि सरकार BRICS शिखर सम्मेलन के बाद इस मामले पर फैसला कर सकती है। सरकार के सामने यह विकल्प है कि विशेष सत्र बुलाया जाए या फिर मानसून सत्र का सत्रावसान कर दिया जाए।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर हो सकती है चर्चा
अगर सरकार विशेष सत्र बुलाने का फैसला करती है तो इसमें महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दे अहम हो सकते हैं।
महिला आरक्षण के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। वहीं परिसीमन के जरिए चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों से जुड़े बदलाव किए जाने हैं।
इन्हीं दोनों मुद्दों को लेकर सरकार की आगे की रणनीति पर नजर बनी हुई है।
2026 के बजट सत्र में भी उठा था मुद्दा
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर 2026 के बजट सत्र में भी संसद में चर्चा हुई थी। सरकार की ओर से इस संबंध में विधेयक पेश किए गए थे।
लेकिन संविधान संशोधन से जुड़े विधेयक को जरूरी बहुमत नहीं मिल सका। इसके बाद उससे जुड़े अन्य विधेयकों पर भी आगे की कार्रवाई नहीं हो पाई।
अब विशेष सत्र की चर्चा के बीच एक बार फिर इन विधेयकों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार BRICS के बाद कर सकती है फैसला
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार BRICS शिखर सम्मेलन के बाद यह तय कर सकती है कि संसद का विशेष सत्र बुलाना है या नहीं।
अगर विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया जाता है तो नवरात्रि के दौरान संसद की बैठक हो सकती है। इस दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर आगे चर्चा हो सकती है।
वहीं अगर सरकार विशेष सत्र नहीं बुलाती है तो मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान किया जा सकता है।
यह भी पढ़ें :महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों की आधिकारिक जानकारी PIB पर पढ़ें।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
संसद के विशेष सत्र को लेकर विपक्ष की तरफ से भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने संसद के मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किए जाने को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि मानसून सत्र खत्म हुए कई दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक सत्रावसान नहीं किया गया है।
जयराम रमेश ने सरकार पर निशाना साधते हुए यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है।
मानसून सत्र में कम हुआ संसद का कामकाज
मानसून सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग मुद्दों को लेकर लगातार हंगामा देखने को मिला। हंगामे की वजह से संसद के कामकाज पर भी असर पड़ा।
अगर रोजाना छह घंटे की संसदीय कार्यवाही को आधार माना जाए तो 15 दिनों में करीब 90 घंटे का काम होना चाहिए था। लेकिन लोकसभा में इस दौरान केवल 15 घंटे 36 मिनट ही काम हो सका।
वहीं राज्यसभा में 15 दिनों के दौरान 24 घंटे 21 मिनट काम हुआ।
इस दौरान कई विधेयकों को पारित करने में भी काफी समय लगा। रिपोर्ट के अनुसार एक बिल को पास कराने में औसतन करीब एक घंटे का समय लगा।
इसी के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।
अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार
संसद के विशेष सत्र को लेकर इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
यानी नवरात्रि में विशेष सत्र बुलाए जाने की चर्चा जरूर है, लेकिन अभी यह तय नहीं है कि सत्र वास्तव में बुलाया जाएगा या नहीं।
BRICS शिखर सम्मेलन के बाद सरकार इस मुद्दे पर क्या फैसला करती है, इस पर अब सभी की नजर है। अगर सरकार विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लेती है तो उसकी तारीख और एजेंडा की जानकारी भी सामने आएगी।
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दे पहले से ही राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में अगर नवरात्रि में संसद का विशेष सत्र बुलाया जाता है तो इन मुद्दों पर संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चा तेज हो सकती है।
अभी स्थिति यही है कि विशेष सत्र की संभावना पर चर्चा चल रही है, लेकिन सरकार की ओर से अंतिम फैसला और आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
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