लाल किले से PM मोदी का बड़ा संदेश: आत्मनिर्भर भारत से विकसित भारत तक, सप्तधारा का रोडमैप और युवाओं के लिए बड़े ऐलान
![]() |
| स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगे की थीम में सजा लाल किला। Source: DD News Live |
नई दिल्ली 15अगस्त 2026। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए विकसित भारत के संकल्प को नई दिशा देने वाला विस्तृत रोडमैप सामने रखा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत, ऊर्जा सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, न्यूक्लियर एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, तकनीक, रक्षा, ग्रीन इकोनॉमी, युवाओं, महिलाओं, खेल और सामाजिक सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों पर विस्तार से बात की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं और संसाधनों के बल पर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई वस्तु सस्ती, जल्दी या आसानी से उपलब्ध हो सकती है, लेकिन केवल आयात करने से देश की क्षमता तैयार नहीं होती। इसलिए भारत को अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करना होगा और अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा स्वयं करनी होगी।
सेमीकंडक्टर से लेकर न्यूक्लियर एनर्जी तक आत्मनिर्भरता पर जोर
प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर को आधुनिक डिजिटल दुनिया की बुनियादी जरूरत बताते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल तकनीक, परिवहन और अनेक आधुनिक प्रणालियां सेमीकंडक्टर पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में कई नए सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू होने की उम्मीद है।
ऊर्जा सुरक्षा को भी प्रधानमंत्री ने विकसित भारत की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और आधुनिक तकनीक के विस्तार के साथ देश को बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी। इसके लिए परमाणु ऊर्जा को महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए उन्होंने 2047 तक 100 गीगावॉट न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य सामने रखा।
प्रधानमंत्री ने समुद्र के भीतर प्राकृतिक संसाधनों की खोज की दिशा में भी आगे बढ़ने की बात कही। उन्होंने समुद्री क्षेत्र में एक्सप्लोरेशन बढ़ाने और नए भंडार खोजने के लिए सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया।
गैस, सौर ऊर्जा और रेलवे विद्युतीकरण का जिक्र
प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में पाइप्ड गैस नेटवर्क के विस्तार को सरकार की तेज गति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि जहां पहले सीमित शहरों में पाइप से गैस पहुंचती थी, वहीं अब इसका विस्तार सैकड़ों शहरों तक हुआ है।
सौर ऊर्जा को लेकर उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी क्षमता में तेजी से वृद्धि की है। प्रधानमंत्री सूर्य घर जैसी पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे परिवारों को अपनी बिजली की जरूरत पूरी करने और अतिरिक्त बिजली से आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।
रेलवे विद्युतीकरण का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय में जहां विद्युतीकरण की गति धीमी रही, वहीं पिछले दशक में इसमें तेजी आई और भारतीय रेल ने व्यापक स्तर पर विद्युतीकरण पूरा किया। उन्होंने कहा कि इससे डीजल पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल रही है।
प्रधानमंत्री ने हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भारत परिवहन के नए ऊर्जा क्षेत्रों में भी अपनी क्षमता दिखा रहा है।
संकटों के बीच आत्मनिर्भरता की ताकत
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी, वैश्विक संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन संकटों ने दुनिया की आपूर्ति व्यवस्थाओं को प्रभावित किया, लेकिन भारत ने अपनी तैयारियों के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
उन्होंने उर्वरक की कीमतों का उदाहरण देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकार ने किसानों पर इसका पूरा बोझ नहीं पड़ने दिया। यूरिया और डीएपी की कीमतों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को राहत देने के लिए आर्थिक भार अपने स्तर पर उठा रही है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश अब अपने हितों और संसाधनों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे समय में भारत को आत्मनिर्भरता के मंत्र के साथ अपनी आर्थिक और रणनीतिक ताकत को और बढ़ाना होगा।
भारत के लिए वैश्विक बाजार में बड़ा अवसर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की वैश्विक भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने स्थिर सरकार, लोकतांत्रिक व्यवस्था, संविधान और मजबूत संस्थाओं को भारत की ताकत बताया।
उन्होंने व्यापार समझौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के उत्पादों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने का अवसर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने उद्योगों से गुणवत्ता, लागत और बड़े पैमाने पर उत्पादन पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को विश्वस्तरीय गुणवत्ता के साथ प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध कराना होगा।
सप्तधारा से विकसित भारत का रोडमैप
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लिए सात प्रमुख शक्तियों पर विशेष जोर दिया। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन, गति शक्ति एवं इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा शक्ति, ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी तथा भारत की सॉफ्ट पावर शामिल हैं।
मैन्युफैक्चरिंग को लेकर उन्होंने कहा कि भारत को छोटे-छोटे कंपोनेंट से लेकर बड़े और जटिल उत्पादों तक पूरी सप्लाई चेन अपने देश में विकसित करनी होगी। डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का भरोसेमंद केंद्र बनाने की जरूरत है। उन्होंने उद्योग जगत को कॉस्ट, क्वालिटी और स्केल पर ध्यान देने की सलाह दी और गुणवत्ता को वैश्विक पहचान बनाने का मंत्र बताया।
कृषि क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने खेत से वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय मसालों, खाद्य पदार्थों, फूलों और कृषि उत्पादों को दुनिया के बाजारों में पहुंचाने की बात कही। प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती की बढ़ती मांग का भी उन्होंने उल्लेख किया।
टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने एआई, क्वांटम, स्पेस, रोबोटिक्स और डेटा सेंटर जैसे नए क्षेत्रों को भारत की अगली बड़ी ताकत बताया। उन्होंने यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में अपनी क्षमता दुनिया के सामने साबित की है। उन्होंने मेड इन इंडिया 6G तकनीक में नेतृत्व का लक्ष्य भी सामने रखा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा में नई गति
गति शक्ति के तहत प्रधानमंत्री ने हाई-स्पीड रेल, आधुनिक हाईवे, इनलैंड वाटरवे, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक बंदरगाहों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के बंदरगाह केवल सामान चढ़ाने-उतारने की जगह नहीं, बल्कि विकास और व्यापार के बड़े केंद्र बनने चाहिए।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को नई पीढ़ी की रक्षा तकनीक में नेतृत्व करना होगा। ड्रोन, काउंटर-ड्रोन, हाइपरसोनिक तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने बदलते युद्ध के स्वरूप का भी उल्लेख किया और कहा कि भविष्य की चुनौतियां केवल सीमा तक सीमित नहीं रहेंगी। साइबर हमले और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाली चुनौतियों के लिए देश को तैयार रहना होगा। इसी संदर्भ में उन्होंने आधुनिक सिविल डिफेंस नेटवर्क विकसित करने की घोषणा की।
ग्रीन इकोनॉमी और भारत की सॉफ्ट पावर
प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को भविष्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने ब्लू इकोनॉमी में भारत के लंबे समुद्री तट को बड़ा अवसर बताया।
भारत की सॉफ्ट पावर का जिक्र करते हुए उन्होंने योग, आयुर्वेद, समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था, हस्तशिल्प, संस्कृति, एनीमेशन, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट को वैश्विक स्तर पर ले जाने की बात कही। पर्यटन को बढ़ावा देने और भारत के प्राकृतिक एवं वन्यजीव संसाधनों को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
Fortune 500 में 50 भारतीय कंपनियों का सपना
प्रधानमंत्री ने भविष्य को लेकर महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी सामने रखे। उन्होंने कहा कि आने वाले दशक में Fortune 500 में भारत की 50 कंपनियां क्यों न हों। उन्होंने वैश्विक स्तर की भारतीय बैंक, फार्मा कंपनियां, टेक्नोलॉजी कंपनियां, कंसल्टिंग और अकाउंटिंग फर्म तथा वैश्विक ब्रांड बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा, क्षमता और लंबा अनुभव है, इसलिए देश को वैश्विक नेतृत्व के लिए आगे बढ़ना चाहिए।
युवाओं के लिए AI प्रशिक्षण और स्टार्टअप पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा का सबसे बड़ा लाभार्थी देश का युवा होगा। उन्होंने स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, स्पेस सेक्टर, ड्रोन नीति और खेलों से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया।
उन्होंने घोषणा की कि आने वाले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल का प्रशिक्षण देने का प्रयास किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का युवा एआई की दुनिया में नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।
उन्होंने स्टार्टअप की बढ़ती संख्या और इनोवेशन के लिए सरकार की ओर से घोषित फंड का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी।
शिक्षा, मेडिकल सीटों और मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का जिक्र
प्रधानमंत्री ने उच्च शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालयों और मेडिकल शिक्षा में बढ़ी क्षमता की बात कही। उन्होंने विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में आने का भी जिक्र किया।
मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों पर कोचिंग के आर्थिक बोझ का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक ढांचे और उपलब्ध शिक्षकों एवं संसाधनों को जोड़कर युवाओं को बेहतर अवसर दिए जा सकते हैं।
खेलों में भारत को नई ऊंचाई देने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने खेलों में भारत के बढ़ते प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए मजबूत दावेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने खेलो इंडिया, यूनिवर्सिटी गेम्स, विंटर गेम्स और बीच गेम्स जैसी पहलों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि जिन खेलों में भारत अभी मजबूत नहीं है, उनमें भी प्रतिभा खोजने की जरूरत है। इसके लिए 5 से 15 वर्ष तक के बच्चों में गांव-गांव, स्कूल-स्कूल खेल प्रतिभा खोजने और उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने की बात कही गई।
नशामुक्त भारत और नक्सलवाद पर भी बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री ने युवाओं को नशे से दूर रखने की अपील की और नशामुक्त भारत अभियान से परिवारों तथा सामाजिक संगठनों को जुड़ने का आह्वान किया।
नक्सलवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सली हिंसा को काफी हद तक कमजोर किया गया है, लेकिन वैचारिक स्तर पर पैदा होने वाली चुनौतियों के प्रति भी सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और विकास, विश्वास तथा प्रयास को आगे बढ़ाने की बात कही।
महिलाओं की भागीदारी और लखपति दीदी पर जोर
प्रधानमंत्री ने देश के विकास में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि फाइटर जेट से लेकर सिविल एविएशन, खेल, विज्ञान, तकनीक और उद्योग तक महिलाएं अपनी क्षमता साबित कर रही हैं।
लखपति दीदी अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और राजनीतिक दलों से लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने के लिए आगे आने की अपील की।
सामाजिक सुरक्षा और आयुष्मान भारत
प्रधानमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिला है। आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बुजुर्गों और गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया।
जनगणना में युवाओं से भागीदारी की अपील
प्रधानमंत्री ने जनगणना को देश की नीतियों और भविष्य की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए युवाओं से सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि सही जानकारी उपलब्ध होने से सरकार बेहतर योजनाएं और नीतियां तैयार कर सकती है। उन्होंने परिवारों से अपनी जानकारी सावधानीपूर्वक भरने और उपलब्ध डिजिटल व्यवस्था का उपयोग करने का आह्वान किया।
2047 के विकसित भारत के लिए एकजुट होने का आह्वान
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि देश को अपनी गति और सोच दोनों बदलनी होंगी। आने वाले वर्षों में वे काम पूरे करने होंगे, जिन्हें पूरा करने में पहले कई दशक लगते थे।
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन के महानायकों और राष्ट्रनिर्माताओं से प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने नागरिकों से राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हित से ऊपर रखने, अपने संकल्पों को शक्ति में बदलने और हर कदम को विकास का कदम बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि समय भारत का है, अवसर भारत का है और संकल्प भी भारत का है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से मिलकर विकसित भारत के सपने को साकार करने की अपील करते हुए अपने संबोधन का समापन “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के जयघोष के साथ किया।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
संसद टाइम पर अपना विचार जरूर बताएं। कृपया मर्यादित भाषा का प्रयोग करें।