Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill 2026 राज्यसभा से पास, नागरिकों पर क्या होगा असर?
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| चित्र साभार (Image Credit): DD India / Sansad TV |
राज्यसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 किया पारित, देर से पंजीकरण के नियम होंगे सख्त
नई दिल्ली, 4 अगस्त 2026: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को राज्यसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत (Voice Vote) से पारित कर दिया। इससे पहले यह विधेयक पिछले सप्ताह लोकसभा से भी मंजूरी मिल चुकी थी। अब राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून का रूप ले सकेगा। सरकार का कहना है कि यह संशोधन जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया। चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया तथा वरिष्ठ मंत्रियों की उपस्थिति की मांग उठाई। विरोध के बीच सदन की कार्यवाही जारी रही और अंततः विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
यह विधेयक जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। सरकार के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में कई मामलों में जन्म या मृत्यु का पंजीकरण वर्षों बाद कराया जाता है, जिससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए पंजीकरण की समय-सीमा और प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाया गया है।
संशोधन के अनुसार यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के औपचारिक आदेश की आवश्यकता होगी। वहीं यदि पंजीकरण दो वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य होगी। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी दस्तावेज तैयार कराने की घटनाओं पर रोक लगेगी और नागरिक रिकॉर्ड अधिक प्रमाणिक बनेंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि संशोधित कानून का उद्देश्य लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना है। समय पर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण होने से सरकारी रिकॉर्ड अधिक सटीक रहेगा और नागरिकों को भविष्य में विभिन्न सेवाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।
विधेयक का एक प्रमुख उद्देश्य जन्म और मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल प्रणाली से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ना भी है। इससे विभिन्न सरकारी विभागों के बीच सूचना का आदान-प्रदान तेज होगा और नागरिकों को बार-बार एक ही दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता कम पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड मजबूत होने से आधार, पासपोर्ट, मतदाता सूची, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और अन्य सरकारी सेवाओं में लाभार्थियों की पहचान अधिक सटीक हो सकेगी। इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की भी उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि कई राज्यों में आज भी जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में अनावश्यक देरी देखने को मिलती है। कई बार वर्षों बाद प्रमाण पत्र बनवाने के कारण रिकॉर्ड का सत्यापन कठिन हो जाता है। नए प्रावधान इस समस्या को कम करने में मदद करेंगे और समय पर पंजीकरण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने इस विधेयक को प्रशासनिक सुधार और बेहतर नागरिक सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। विपक्ष ने कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए और चर्चा के दौरान विरोध भी दर्ज कराया। इसके बावजूद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी।
इससे पहले लोकसभा भी इस विधेयक को पारित कर चुकी है। दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद संशोधित कानून पूरे देश में लागू किया जाएगा और संबंधित नियमों के अनुसार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया संचालित होगी।
सरकार का विश्वास है कि इस संशोधन से देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था अधिक मजबूत बनेगी, रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी और नागरिकों को भविष्य में विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में सुविधा मिलेगी। साथ ही, समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देकर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

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