लोकसभा में पीएम मोदी का बड़ा बयान: पंचायत से संसद तक महिलाओं की भागीदारी पर जोर

लोकसभा में महिला नेतृत्व पर बोलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
लोकसभा की कार्यवाही का दृश्य।|स्रोत: ETV Bharat / Sansad TV

 लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने महिला नेतृत्व पर रखा पक्ष, पंचायत से संसद तक बढ़ती भागीदारी पर दिया जोर

नई दिल्ली 07 अगस्त 2026: लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी और पंचायत स्तर पर उभरे नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 25–30 वर्षों में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। 

उन्होंने कहा कि पंचायतों में लाखों महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में काम कर चुकी हैं और अब वे केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि विधानसभा और संसद जैसी निर्णय लेने वाली संस्थाओं में भी अपनी प्रभावी भागीदारी चाहती हैं।

पंचायतों से तैयार हुआ महिला नेतृत्व

प्रधानमंत्री ने कहा कि पंचायत राज व्यवस्था में महिलाओं को आरक्षण मिलने के बाद लाखों महिलाएं जमीनी स्तर पर नेतृत्व कर चुकी हैं। पहले बहुत-सी महिलाएं सार्वजनिक जीवन में कम बोलती थीं, लेकिन अब उन्होंने प्रशासन, विकास और जनसमस्याओं को नजदीक से समझा है। इस अनुभव ने उनमें आत्मविश्वास और राजनीतिक चेतना पैदा की है।

उन्होंने कहा कि इन महिलाओं ने गांवों की समस्याओं, विकास कार्यों और जनता के सुख-दुख को करीब से देखा है। यही अनुभव अब उन्हें बड़े स्तर पर जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार कर चुका है।

केवल स्थानीय जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहना चाहतीं महिलाएं

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब महिलाएं यह सवाल उठा रही हैं कि उन्हें केवल सफाई, पेयजल या अन्य स्थानीय कार्यों तक ही क्यों सीमित रखा जाए, जबकि बड़े नीतिगत फैसले विधानसभा और संसद में लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की यह सोच भारतीय लोकतंत्र में एक सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।

उनके अनुसार, निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से शासन व्यवस्था अधिक संवेदनशील और जनहितकारी बन सकती है।

राजनीतिक दलों को बदलते समय को समझना होगा

प्रधानमंत्री ने कहा कि जो भी व्यक्ति या राजनीतिक दल भविष्य की राजनीति में आगे बढ़ना चाहता है, उसे इस बदलाव को स्वीकार करना होगा। उन्होंने कहा कि लाखों महिलाएं अब जमीनी स्तर की नेता बन चुकी हैं और उनकी राजनीतिक आकांक्षाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी को केवल 33 प्रतिशत आरक्षण के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। यह देश की लोकतांत्रिक शक्ति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

महिलाओं के अधिकारों का विरोध राजनीतिक रूप से महंगा पड़ सकता है

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी महिलाओं को अधिकार देने का प्रश्न आया है, उसका विरोध करने वालों को जनता ने पसंद नहीं किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़े विषयों पर राजनीतिक दलों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

प्रधानमंत्री का कहना था कि जो लोग आज भी महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का विरोध करेंगे, उन्हें भविष्य में इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा महिलाओं का सशक्तिकरण

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल सड़क, रेल, हवाई अड्डे या आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। वास्तविक विकास तब होगा जब देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी यानी महिलाओं की नीति निर्धारण में समान और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित होगी।

उन्होंने कहा कि महिलाओं का नेतृत्व बढ़ने से लोकतंत्र मजबूत होगा और शासन व्यवस्था में संवेदनशीलता तथा जवाबदेही भी बढ़ेगी।

लोकतंत्र को मिलेगा नया आयाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारतीय लोकतंत्र को नई दिशा दे सकती है। उनके अनुसार, यह केवल किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यदि सभी राजनीतिक दल इस दिशा में सकारात्मक सहयोग करें तो इसका लाभ पूरे देश को मिलेगा। महिलाओं का अनुभव, नेतृत्व क्षमता और जनसरोकारों की समझ आने वाले समय में भारत की नीति निर्माण प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बना सकती है।

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